84 most popular yogasanas 84 सर्वाधिक लोकप्रिय योगासन

एडवांस दुनिया की बिजी लाइफस्टाइल में योगा ने लोगों को मानसिक और शारीरिक लाभ पहुंचाने में अहम योगदान दिया है। योग न सिर्फ हमारी शरीर में स्फूर्ती (activeness) लाता है, बल्कि हमारे दिमाग (mood) को रिफ्रेश और एक्टिव बनाता है। डेली लाइफ में योग करने से हमें कई लाभ मिलते हैं। इसके अलावा हमारे को शांति भी मिलती है।

योगा के बारे में लोग भले ही हाल में जानना शुरू किए हैं, लेकिन आपको यकीन नहीं होगा कि एक प्राचीन विद्या है। कुछ लोग योगासनों को सीखने के लिए योगा क्लासेस तक ज्वॉइन करते हैं। वहीं, कई लोग अपने घर में ही नियमित दिनचर्या का हिस्सा बनाकर करते हैं। योगा हमारे शरीर के लिए अत्यंत लाभकारी है। ये पूरे शरीर को स्वस्थ रखने के साथ-साथ तनाव, चिंता और अवसाद से लड़ने में भी मदद करते हैं।

आइए सबसे पहले जानते हैं 84 सर्वाधित लोकप्रिय योगासन 84 most popular yogasan के बारे में-

  1. धनुरासन (Dhanurasana) – इसमें शरीर की आकृति सामान्य तौर पर खिंचे हुए धनुष के समान हो जाती है, जिस कारण इसे धनुरासन कहा जाता है। इसे करने से शरीर में चुस्ती बनी रहती है और पाचन तंत्र मजबूत होता है। हालांकि, उच्च रक्तचाप से ग्रसित लोगों को यह आसन करने से बचना चाहिए।

धनुरासन के फायदे-

  • यह आसन डिप्रेशन के लक्षण को कम करने में फायदेमंद है
  • पेट के मांसपेशियों को मजबूत करता है
  • मोटापा को कम करता है और शरीर को संतुलित बनाने में मदद करता है
  • पीठ या कमरदर्द से राहत दिलाता है
  • मांसपेशियों और हड्डी को मजबूत करता है
  • इस आसन को करने से हाथ और बाहों में कसावट बनी रहती है
  • महिलाओं में मासिक धर्म की अनियमितता दूर होती है
  • इसे करने से भूख बढ़ती है
  1. भुजंगासन (cobra pose or bhujangasan)- भुजंगासन में शरीर की आकृति फन उठाए हुए भुजंग अर्थात सांप जैसी बनती है इसीलिए इसको भुजंगासन या सर्पासन कहा जाता है। अंग्रेजी में इस आसन को कोबरा पोज (Cobra Pose) कहा जाता है। पेट संबंधी कोई भी समस्या से निजात पाने के लिए इसे रोजाना करना चाहिए।

भुजंगासन के फायदे-

  • इसे रोजाना करने से लंबाई बढ़ती है
  • मांसपेशियां मजबूत होती हैं
  • शरीर में लचीलापन बढ़ता है
  • तनाव और थकान दूर होती है
  • कंधों और बाहों को मजबूती मिलती है
  • अस्थमा के लक्षणों से आराम मिलता है
  • हृद्य स्वस्थ होता है
  • कमर पतली, सुडोल और आकर्षक बनती है
  1. शीर्षासन (Headstand yoga)- सिर के बल किए जाने की वजह से इस योगासन को शीर्षासन कहते हैं। शीर्षासन एक ऐसा आसन है, जिसके अभ्यास से शख्स कई बड़ी-बड़ी बीमारियों से दूर रहता है। हालांकि, यह काफी मुश्किल है। यह हर व्यक्ति के लिए सहज नहीं है। इससे पाचनतंत्र अच्छा रहता है और रक्त संचार सुचारू रहता है।

शीर्षासन के फायदे-

  • सिर दर्द से राहत और चक्कर आने की समस्या कम होती है
  • बालों की समस्या से निजात मिलता है
  • रक्त प्रवाह में सुधार होता है
  • कंधे, गर्दन, पेट और रीढ़ की हड्डी मजबूत होती है
  • तनाव और चिंता से राहत मिलती है
  1. पद्मासन (Lotus Pose or Padmasan)- पद्म का अर्थ है कमल। जब यह आसन किया जाता है तो योग करने वाला शख्स कमल के पुष्प के समान नजर आता है। यही वजह है कि इसे इंग्लिश में लोटस पोज और कमलासन के नाम से भी जाना जाता है। इस पोजिशन में बैठकर प्राणायाम भी किया जाता है।

पद्मासन के फायदे-

  • यह आसन सबसे आसान है और इसे सभी उम्र के लोग कर सकते हैं
  • यह रक्त परिसंचरण में वृद्धि, पेट के अंगों, टखनों, पैरों को टोन करता है और कूल्हे को अधिक लचीला बनाता है
  • यह मन और मस्तिष्क को शांत करता है
  • इसे करने से  घुटनों और जांघों को अच्छा खिंचाव मिलता है
  • एकाग्रता बढ़ाने और ध्यान केंद्रित करने के लिए उत्तम आसन है
  • यह आसन पाचन सुधारने और मांसपेशियों के तनाव को कम करने में भी मदद करता ह
  • यह रक्तचाप को नियंत्रण में लाता है
  1. उत्थित पार्श्वकोणासन (Extended Side Angle Pose)- आधुनिक योग में व्यायाम के रूप में यह एक आसन है। यह आसन तीन शब्दों से मिलकर बना है- उत्थित, पार्श्व और कोण। उत्थित का मतलब- उठा हुआ, पार्श्व का अर्थ है- छाती के दाएं-बाएं का भाग और कोण मतलब कोना। इसमें कई आवश्यक मांसपेशी समूहों का उपयोग करना शामिल है। जैसे- पैर, टखने, कमर, छाती, फेफड़े, कंधे, रीढ़ और पेट।

उत्थित पार्श्वाकोण के फायदे-

  • स्टैमिना बढ़ता है
  • कमर दर्द से राहत मिलती है
  • कब्ज, बांझपन और मासिक धर्म की परेशानी का भी इलाज है
  • पैर और घुटनों को मजबूत बनाता है
  • कूल्हे, कंधे, छाती और रीढ़ की हड्डी में खिचाव लाता है
  1. नटराजासन (Natrajasan, Lord of the dance pose, dancer pose) –  यह आसान आधुनिक योग में एक खड़े, संतुलन, पीछे झुकने वाला आसन है, जो कि शास्त्रीय भारतीय नृत्य रूप भरतनाट्यम की एक मुद्रा से लिया गया है। इस मुद्रा को नटराज मंदिर, चिदंबरम में मंदिर की मूर्तियों में दर्शाया गया है। इस आसन को अंग्रेजी में नटराजासन के अलावा लॉर्ड ऑफ द डांस पोज या डांसर पोज भी कहा जाता है।

नटराजासन के फायदे-

  • इसे नियमित करने से वजन कम करने में मदद मिलती है
  • इसे करने से एकाग्रता (Focus) बढ़ता है
  • तनाव की कमी और दिमाग को शांति मिलती है
  • जांघ, कूल्हे और सीना स्ट्रेच होकर मजबूत बनता है
  • शरीर का पॉश्चर सुधरता है
  • हलासन (Halasan or Plough Pose)- इस आसन में शरीर का आकार हल जैसा बनता है इसलिए इसे हलासन कहते हैं। हलासन हमारे शरीर को लचीला बनाता है। वहीं, इसके नियमित अभ्यास से इससे हमारी रीढ़ सदा जवान बनी रहती है। अंग्रेजी में इसे प्लो पोज भी कहते हैं।

हलासन के फायदे-

  • ये आसन वजन कम करने में मदद करता है
  • कब्ज, बदहजमी और पेट से जुड़ी सभी समस्याओं से निजात दिलाता है
  • अनिद्रा और तनाव को दूर करता है
  • वज्रासन- वज्र का अर्थ होता है बिजली या कठोर। यह ध्यानात्मक आसन है, जो मन की चंचलता को दूर करता है। भोजन के बाद किया जानेवाला यह एक मात्र आसन है।

वज्रासन के फायदे-

  • यह पीठ को मजबूत बनाता है और उसके निचले हिस्से की समस्याओं से राहत दिलाता है
  • मांसपेशियों को मजबूत करता है
  • पाचन में सुधार करता है और नियमित करने से कब्ज को खत्म करता है
  • प्रसव पीड़ा को कम करने में मदद करता है और मासिक धर्म की ऐंठन को भी कम करता है
  • इसके नियमित अभ्यास से वजन कम किया जा सकता है
  • वज्रासन पेट की चर्बी को कम करने में भी मदद करता है
  • वीरभद्रासन (Warrior Pose)- यह आसन योद्धाओं का आसन माना जाता है। वहीं, इसे पावर योग (Power Yoga) का आधार भी माना जाता है। ये आसन योगा का सबसे आसान या बिगिनर लेवल का आसन कहा जाता है।

वीरभद्रासन के फायदे-

  • इससे छाती और फेफड़ों में खिंचाव आता है
  • कंधे, गर्दन और पेट में खिंचाव होता है
  • पीठ, बाजुओं और कंधों की मांसपेशियों को मजबूती मिलती है
  1. चक्रासन (Chakrasan)- इस आसन को करने के दौरान शरीर की मुद्रा किसी चक्र के समान दिखाई देती है, इसलिए इसे चक्रासन कहा जाता है। इसे ऊर्ध्व धनुरासन भी कहा जाता है। यह शरीर को टोन करने के साथ ही मजबूती भी प्रदान करता है।

चक्रासन करने के फायदे-

  • आंखों की रोशनी तेज होती है
  • तनाव और अवसाद दूर होता है
  • पाचन और प्रजनन अंग स्वस्थ होते हैं
  • हाथ, पैर और पीठ की मांसपेशियों को मजबूत बनाता है
  • पेट की चर्बी को कम करता है
  • अस्थमा रोगियों के लिए काफी फायदेमंद है
  1. सूर्य नमस्कार- ये सभी योगासनों में सर्वश्रेष्ठ है। इसमें 12 आसन होते हैं और यह अकेला अभ्यास ही साधक को सम्पूर्ण योग व्यायाम का लाभ पहुंचाने में समर्थ है। इसके अभ्यास से साधक का शरीर निरोग और स्वस्थ होकर तेजस्वी हो जाता है। सूर्योदय के दौरान सूर्य नमस्कार करने से शरीर में विटामिन डी प्रचुर मात्रा में मिलता है। इसके अलावा इसके नियमति अभ्यास से कई बीमारियों से बचा जा सकता है।

सूर्य नमस्कार के फायदे-

  • पाचन तंत्र मजबूत होता है और पेट संबंधित समस्या दूर होती है
  • ये शरीर से अनावश्यक फैट को कम करता है
  • शरीर में लचीलापन लाता है
  • हड्डियों को मजबूत करता है
  • तनाव दूर करता है
  • ब्लड सर्कुलेशन को बढ़ाता है
  • अनिद्रा की परेशानी से निजात दिलाता है
  • त्वचा संबंधी समस्याओं को दूर कर खूबसूरत बनाता है
  1. सिद्धासन-  ये आसन सभी सिद्धियों को प्रदान करने वाला है, इसलिए इसे सिद्धासन कहा जाता है। इसके अभ्यास से शरीर की समस्त नाड़ियों का शुद्धिकरण होता है।

सिद्धासन के फायदे-

  • मन स्थिर होता है
  • शरीर की 72,000 नाड़ियों को शुद्ध करता है
  • रीढ़ की हड्डी को मजबूत करता है
  • दमा और अस्थामा से मुक्ति मिलती है
  • पाचन क्षमता बेहतर होती है
  • भूख न लगना, थकान, अनिद्रा अवसाद कम करने में भी मदद मिलती है
  1. उष्ट्रासन (Camel Pose)-  इस आसन के अभ्यास के दौरान शरीर ऊंट जैसी मुद्रा में होता है, इसलिए इसे उष्ट्रासन कहा जाता है। यह आसन महिलाओं के लिए बेहद लाभकारी है। मासिक चक्र को सही करने के लिए यह आसन बहुत प्रभावी है। साथ ही इन दिनों होने वाले दर्द को भी यह नियंत्रित करता है।

उष्ट्रासन के फायदे-

  • पीठ और कंधों को मजबूती देता है
  • कमर दर्द से छुटकारा दिलाता है
  • रीढ़ की हड्डी में लचीलापन लाता है
  • अनियमित मासिक धर्म की समस्या से छुटकारा दिलाता है
  • वक्षों के आकार को सही करता है
  • पेट, डबलचिन और कमर के मोटापे को कम करता है
  1. ताड़ासन (Mountain Pose)-  इस आसन को अंग्रेजी में माउंटेन पोज कहा जाता है क्योंकि यह एक स्थाई आसान है।

ताड़ासन के फायदे-

  • शरीर में महसूस होने वाला भारीपन दूर होता है
  • शरीर को फिट रखता है
  • रीढ़ को सीधा करने में काफी मददगार है
  • पूरी बॉडी फ्लेक्सिबल बनती है
  • हाईट बढ़ाने में फायदेमंद है

  1.  भैरवासन- भैरवासन में शरीर को सीधे पैर और एक हाथ पर संतुलित किया जाता है।

भैरवासन के फायदे-

  • पूरे शरीर में एक प्रकार की ऊर्जा निर्मित होती है
  • रक्त संचार अच्छा होता है
  1.  शवासन (Corpse Pose)- शव का अर्थ होता है- मृत। यानी अपने शरीर को शव के समान बना लेना। यही कारण है कि इस आसन को शवासन कहा जाता है। इस आसन का उपयोग योगसत्र को समाप्त करने के लिए किया जाता है। यह एक शिथिल करने वाला आसन है, जो शरीर, मन और आत्मा को नवस्फूर्ति प्रदान करता है।

शवासन के फायदे-

  • अस्थाई चिंता और तनाव से राहत मिलती है
  • ऑफिस या बाहर की थकान मिटाने के लिए काफी फायदेमंद है
  • फोकस और याद्दाश्त बढ़ाने में मदद करता है
  • हाई ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने में मदद करता है
  • सिरदर्द और अनिद्रा से राहत दिलाने के लिए शवासन करने की सलाह दी जाती है
  1.  सेतुबंध आसन– इस आसन को करने के दौरान शरीर एक ब्रिज यानी सेतु जैसी मुद्रा में होता है इसलिए इसे सेतुबंध आसन कहा जाता है।

सेतुबंध आसन के फायदे-

  • नियमित अभ्यास करने से कमर दर्द हमेशा-हमेशा के लिए गायब हो सकता है
  • थाइरॉइड के लिए बहुत प्रभावी है
  •  रीढ़ की हड्डी में अच्छी लचक देखी जा सकती है
  • पेट की चर्बी कम होती है
  • किडनी स्वस्थ होती है
  • अस्थाम के मरीजों के लिए बेहद फायदेमंद है
  1. नावासन- इस आसन को करने के दौरान शरीर एक नाव जैसा लगने लगता है इसलिए इस आसन को नावासन कहा जाता है।

नावासन के फायदे-

  • तनाव से छुटकारा मिलता है
  • मांसपेशियां मजबूत होती है
  • पाचन क्रिया तंदरुस्त होती है
  1. सवर्गांसन- ये आसन दो शब्दों से मिलकर बना है- सर्व और अंग। यानी सभी अंगों का आसन। इस आसन को करने से सभी अंगों को व्यायाम मिलता है इसीलिए इसे सर्वांगासन कहते हैं।

सर्वांगसन के फायदे-     

  • दिल की मांसपेशियों को सक्रिय करता है
  • थायरॉइड ग्रंथि को सक्रिय करता है तथा उसका पोषण करता है
  • बांझपन और गर्भपात जैसी समस्याएं दूर होती हैं
  • मासिक धर्म संबंधी परेशानियां दूर होती हैं 
  • कब्ज से राहत मिलती है
  • थकान और दुर्बलता को दूर करने में भी यह आसन बेहद लाभकारी है
  • हाथों और कंधों को मजबूत बनाता है
  • मोटापा कम करने में मदद करता है
  • त्रिकोणासन- ये आसन शरीर को तीन अलग कोणों से एक साथ स्ट्रेचिंग देता है और पूरी शरीर के सामान्य फंक्शन को बेहतर ढंग से चलाने में मदद करता है। मधुमेह और मोटापे से परेशान लोगों के लिए यह आसन बेस्ट ऑप्शन है।

त्रिकोणासन के फायदे-   

  • मानसिक और शारीरिक स्थिरता को बढ़ाता है
  • इस आसन का नियमित अभ्यास घुटनों, टखने, पैरों, सीने और हाथों को मजबूत बनाता है
  • त्रिकोणासन ग्रोइन, हिप्स, हैमस्ट्रिंग, पिंडली, सीने, स्पाइन और कंधों को स्ट्रेच देता है
  • ये पाचन सुधारता है और पेट के निचले अंगों को उत्तेजित करता है
  • यह आसन फ्लैट फिट, ऑस्टियोपोरोसिस, गर्दन के दर्द और नपुंसकता को दूर करता है
  • स्ट्रेस को कम करता है और एंग्जाइटी को ठीक करता है
  • स्टैमिना बढ़ाने में मदद मिलती है
  • हिप्स स्ट्रांग बनते हैं
  • त्वचा संबंधी परेशानियों को दूरकर चेहरे को चमकदार बनाता है
  • पश्चिमोत्तानासान (Paschimottanasana)- ये आसन व्यायाम के रूप में बैठकर आगे झुकने वाला आसन है। इस योग का नियमित अभ्यास मन को शांत करता है और तनाव से भी छुटकारा दिलाता है।

पश्चिमोत्तानासान के फायदे-

  • थकान, तनाव और डिप्रेशन दूर होता है
  • स्पर्म संबंधी समस्याओं को दूर करने में मदद करता है
  • पेट और कूल्हों की चर्बी कम होती है
  • पाचन तंत्र अच्छा रहता है
  • मोटापा कम करने में मदद करता है
  • वृक्षासन (Tree Pose)- यह एक प्रकार का हठ योग है, जो दो शब्दों से मिलकर बना है। पहला शब्द है वृक्ष और दूसरा है आसन यानी वृक्ष के समान खड़े होकर आसन लगाना। अंग्रेजी में इसे ट्री पोज कहा जाता है।

वृक्षासन के फायदे-

  • पैर को मजबूत बनाता है
  • ये न सिर्फ शारीरिक बल्कि मानसिक विकास भी करता है
  • पीठ दर्द कम होता है
  • बच्चों की लंबाई बढ़ती है
  • साइटिका से राहत मिलती है
  • शारीरिक संतुलन बनाता है
  • बद्धकोणासन- इसे भद्रासन भी कहा जाता है। ध्यान के दौरान करने वाली मुद्रा में से एक है।

बद्धकोणासन के फायदे-

  • ज्यादा चलने से होनी वाली थकान से राहत मिलती है
  • प्रसव आसानी से हो जाता है
  • मासिक धर्म में होने वाली असुविधा को कम करता है
  • चतुरंग दंडासन (Fore Limbed Staff pose)- चतुरंगा दंडासन को फोर-लिम्बर्ड स्टाफ पोज भी कहा जाता है। इसके अलावा लो प्लैंक के रूप में भी जाना जाता है। आधुनिक योग में व्यायाम के रूप में यह एक आसान आसन है और सूर्य नमस्कार के कुछ रूपों से मिलता-जुलता है, जिसमें जमीन के समानांतर एक सीधा शरीर पैर की उंगलियों और हथेलियों द्वारा समर्थित है, कोहनी के साथ।

चतुरंग दंडासन के फायदे-

  • इस आसन के अभ्यास से बाजु और कलाईयां मजबूत होती हैं
  • कंधों में ताकत बढ़ती है
  • एब्ज को मजबूती मिलती है, जिससे पेट की चर्बी कम होने लगती है
  • गोमुखासन- गोमुख का अर्थ होता है गाय का मुख। यानी अपने शरीर को गाय के मुख (गौमुख) के समान बना लेना। यही वजह है कि इस आसन को गोखासन कहा जाता है

गोमुखासन के फायदे-

  • इस आसन को करने से शरीर में बेहतर तरीके से रक्त प्रवाह होता है और हृदय स्वस्थ होता है
  • शरीर में लचीलापन बढ़ता है
  • इस योग के नियमित अभ्यास से मधुमेह को नियंत्रित किया जा सकता है
  • इस योगासन की रोजाना प्रैक्टिस से मांसपेशियों को मजबूती मिलती है
  • तनाव और चिंता से राहत मिलती है
  • विपरीत दंडासन (Inverted Staff Pose)- इस योगासन के नाम से ही जाहिर हो रहा है कि दंडासन के विपरीत है यह योगसान। यह उल्टा-सीधा झुकने वाला पोज है।

विपरीत दंडासन के फायदे-

  • दिमाग को शांत करता है और एंग्जाइटी लेवल को करता है
  • शरीर लचीला बनता है और मजबूती मिलती है
  • पाचन प्रक्रिया को मजबूती मिलती है
  • साइटिका की समस्या से निजात दिलाने में मदद करता है
  • रीढ़ की हड्डी, हैमस्ट्रिंग, कंधे, गर्दन और पेट की मांसपेशियों के लिए लाभदायक है
  • अष्टांग नमस्कार- ये आसन सूर्य नमस्कार का एक चरण है, जिसमें शरीर 8 अंगों द्वारा भूमि को स्पर्श करता है। इन 8 अंगों में- दोनों पांव, दोनों घुटने, दोनों हथेलियां, छाती और ठुड्डी (Chin) शामिल हैं।

अष्टांग नमस्कार के फायदे-

  • यह आसन पीठ के स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभदायक है
  • इसके अभ्यास से फेफड़ों से संबंधित बीमारियों का प्रभाव कम हो सकता है
  • आर्म बैलेंसिंग में अहम रोल अदा करता है
  • इसके नियमित अभ्यास से पेट की चर्बी कम होती है
  • पैर की उंगिलयों को मजबूती मिलती है
  • पाचन सुधरता है
  • शरीर को मजबूती और लचीलापन देता है
  • शलभासन (Grasshopper Pose) – शलाभसन को टिड्डी मुद्रा यानी ग्रासहॉपर पोज भी कहा जाता है। ये एक प्रवण पीठ झुकने वाला आसन है।

शलभासन के फायदे-

  • वजन कम करने के लिए अच्छी योग मुद्रा है 
  • यह शरीर की चर्बी को खत्म करने में मदद करती है
  • मांसपेशियों को मजबूत करती है
  • रीढ़ की हड्डी को मजबूत करने के लिए शलभासन अच्छा योग है 
  • पेट के पाचन तंत्र को ठीक करता करता है, जिससे पेट संबंधी बीमारियां नहीं होती है
  • कब्ज को ठीक करता है और शरीर में अम्ल और क्षार का संतुलन बनाए रखता है
  • बकासन– ये आसन आर्म बैलेंसिंग पोज होता है, जिसमें फर्श पर दोनों हाथ रखकर पैर को ऊपर उठाया जाता है और गुठनों को हाथों की ऊपरी बांहो की पिंडली से जोड़ा जाता है।

बकासन के फायदे-

  • अपर बैक को अच्छा स्ट्रेच मिलता है
  • दिमाग और शरीर चुनौतियों के लिए तैयार होने लगता है
  • पेट की निचली मांसपेशियां मजबूत होती हैं और पाचन क्रिया में सुधार आता है
  • इस आसन से आपके शरीर का बैलेंस और फोकस सुधरता है
  • ये आपकी कलाइयों और हाथों को मजबूत बनाता है
  • रीढ़ की हड्डी और जांघ की भीतरी मांसपेशियां मजबूत होने लगती हैं
  • उपविष्टकोणासान (Wide Angle Side Forward Bend)- इस आसन के अभ्यास के लिए जितना संभव हो सके उतना व्यापक रूप से पैरों को साथ सीधे बैछना होता है और फिर पैरों की उंगलियों को पकड़ना और आगे झुकना होता है।

उपविष्टकोणासन के फायदे-

  • शरीर और दिमाग को रिलेक्स करता है
  • किडनी को साफ करने में मदद करता है
  • लोअर बॉडी में फैट को कम करता है
  • सेक्सुअल डिजायर को बढ़ाने में मददगार है
  • अस्थमा से राहत दिलाने में बहुत मदद करता है
  • उत्कटासन ( Chair Pose)– इस आसन के अभ्यास के लिए पैरों को पंजे भूमि पर टिके हों और फिर एड़ियों के ऊपर नितंब टिकाकर बैठना होता है। ध्यान रहे- दोनों हाथ घुटनों के ऊपर और घुटनें फैले हों। वहीं, एड़ियों समान और स्थिर हों।

उत्कटासन के फायदे-

  • कमर मजबूत होती है
  • जांघों और पंजों में मजबूती आती है
  • शरीर में ताजगी बनी रहती है
  • पेट की समस्याओं से छुटकारा मिलता है
  • उत्तानासन ( Standing Forward Bend)- उत्तानासन के अभ्यास के दौरान सीधे खड़े होकर झुकते हैं और पैरों की उंगलियों को पकड़ते हैं। इस आसन को अंग्रेजी में स्टैंडिंग फरवर्ड बेंड पोज कहते हैं

उत्तनासन के फायदे-

  • रोग प्रतिरोधात्मक क्षमता को बढ़ाने में मदद करता है
  • पीठ, हिप्स, पिंडली औप टखनों को अच्छा स्ट्रेच देता है
  • पाचन संबंधी अंगों को अच्छी मसाज देता है
  • इस आसन का नियमित अभ्यास किडनी और लीवर को सक्रिय करता है
  • सिरदर्द और इंसोमिया की समस्या होने पर आराम देता है
  • हाई BP, अस्थमा, नपुंसकता, साइनोसाइटिस और  ऑस्टियोपोरोसिस को ठीक करता है
  •   अधो मुखश्वासनइस आसन के अभ्यास के दौरान शरीर को ऊपर की ओर उलटे ‘V’ के शेप में लाया जाता है। अध का अर्थ होता है नीचे और मुख का अर्थ चेहरा और श्वान का अर्थ कुत्ता। यानी कुत्ते की तरह शरीर दिखता है, जिसमें चेहरा नीचे धरती की ओर होता है

अधो मुखश्वासन के फायदे-

  • शरीर को लचीला और सक्रिय बनाता है
  • सिर दर्द, अनिद्रा और पीठ दर्द से राहत दिलाता है
  • गर्भासनयह एक ऐसा आसन है, जिसमें शरीर गर्भ में पल रहे एक शिशु के समान दिखता है।

गर्भासन के फायदे-

  • मासिक धर्म के दौरान महिलाओं को होने वाले दर्द और परेशानी से राहत देता है
  • मानसिक तनाव और गुस्सा कम होता है
  • फोकस और शांति बढ़ती है
  • पेट की मांसपेशियां मजबूत होती हैं और गैस-कब्ज से राहत मिलती है
  • शरीर में ब्लड और ऑक्सीजन लेवल सुधरता है, जिससे स्किन ग्लो करने लगती है
  • गरूडासन- इस आसन के अभ्यास के दौरान सीधे खड़े होकार अपने बाएं पैर को सीधा रखते हैं और फिर दाएं पैर को बाएं पैरे के घुटने के ऊपर रखते हैं। साथ ही दोनों हाथों को आपस में एक के ऊपर एक रखकर कस के पकड़ते हैं।

गरुडासन के फायदे-

  • उत्थित हस्तपादाड्गुष्ठासनउत्थित हस्त पादाङ्गुष्ठासन, स्थायी रूप से बड़ा पैर पकड़ना या विस्तारित हाथ-से-बड़ा पैर की अंगुली का व्यायाम के रूप में आधुनिक योग में एक स्थायी संतुलन आसन है|

उत्थित हस्तपादाड्गुष्ठासन के फायदे

  • इस आसन के नियमित अभ्यास से पैरों को मजबूती और दर्द से आराम मिलता है
  • शारीरिक और मानसिक संतुलन बना रहता है
  • ध्यान रखने की क्षमता और एकाग्रता बढ़ती है
  • श्वसन प्रक्रिया में सुधार होता है
  • अञ्जनेयासन (Crescent Pose or Equestrian Pose) ये एक लंगिंग बैक आसन है, जो कभी-कभी सूर्य नमस्कार के अनुक्रम आसनों में से एक रूप में शामिल है।

  अञ्जनेयासन के फायदे-

  • शरीर को लचीला बनाता है
  • हड्डियों को मजबूत करता है
  • शरीर में स्फूर्ती लाता है
  • बॉडी से एक्सट्रा फैट को कम करता है
  • मांसपेशियों को मजबूत बनाता है
  • बिडलासन- इस आसन को टाइगर पोज भी कहा जाता है। इस योगासन के अभ्यास के दौरान एक घुटना जमीन से सटा होता है और दूसरा पैर सीधा होता है। वहीं, एक हाथ का पंजा पर जमीन पर होता है।  

बिडलासन के फायदे-

  • पेट, कमर, हिप्स और जांघ का फैट कम होता है
  • कई स्त्री रोगों से निजात दिलाने में मदद करता है
  • दंडासन ( Staff Pose)- दंडासन एक संस्कृत शब्द है। इसमें दंड का अर्थ है डंडा या छड़ी और आसन मतलब मुद्रा। इस योगासन के अभ्यास के दौरान शरीर के एक छड़ी के समान मुद्रा में नजर आता है इसलिए इस आसन को दंडासन कहते हैं।

दंडासन के फायदे-

  • ये आसन पीठ की मांसपेशियों को मजजबूत बनाता है
  • शरीर की मुद्र में सुधार होता है
  • रीढ़ की हड्डी से जुड़ी सभी समस्याएं दूर होती हैं और मजबूती मिलती है
  • कंधों  और छाती में खिंचाव आता है
  • एकाग्रता बढ़ाने में मदद करता है
  • अस्थमा से ग्रसित लोगों के लिए काफी लाभदायक है
  • क्रोंचासन- इस आसन के अभ्यास के दौरान शरीर सारस के समान नजर आता है। संस्कृत में सारस को क्रोंच कहा जाता है इसलिए इस आसन का नाम क्रोंचासन है।

क्रोंचासन के फायदे

  • शरीर में रक्त का प्रवाह ठीक ढंग से होता है
  • गैस और ब्लोटिंग में बेहद फायदेमंद है
  • पेट की चर्बी कम करने और छाती फैलाने में भी मदद करता है
  • ­­­­­पैरों, पीठ, हैमस्ट्रिंग, घुटनों, पिंडलियों और कूल्हों पर अच्छा खिंचाव मिलता है
  • पैरों के समतल होने की समस्या में बहुत फायदेमंद माना जाता है
  • अनंतासन-  इस आसन को विष्णु आसन भी कहा जाता है। दरअसल, इस योगासन के अभ्यास के दारन शरीर भगवान विष्णु की आराम मुद्रा के   नाम पर रखा गया हैं। अनंतासन एक संस्कृत भाषा का शब्द है, जिसके पहले शब्द अनंत का अर्थ असीम और आसन का अर्थ मुद्रा है।

अनंतासन के फायदे-

  • ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है
  • जांघें मजबूत होती है
  • पाचन क्रिया सही रहती है
  • ब्लड प्रेशर के रोगियों के लिए बेहद लाभकारी है
  • जठर परिवर्तनासन- यह तीन शब्दों से मिलकर बना है जठर, परिवर्तन और आसन। जठर का मतलब होता है पेट, परिवर्तन का अर्थ होता है मरोड़ना और आसन का अर्थ होता है मुद्रा।

जठर परिवर्तानासन के फायदे-

  • मोटापा दूर होता है
  • किडनी से संबंधित समस्याएं दूर होती हैं
  • गैस और एसिडिटी से निजात मिलता है
  • रीढ़ में लचीलापन आता है
  • वृश्चिकासन- इस योगासन का अभ्यास थोड़ा कठिन होता है। इस आसन के अभ्यास के दौरान शरीर को बिच्छू के जैसी मुद्रा में ले जाना होता है। यह आसन एक बैकबेंड और फोरआर्म बैलेंस पोज का कॉम्बिनेशन है और इस योग मुद्रा या आसन को आसानी से करने के लिए संतुलन, लचीलापन और हाथों की मजबूती जरूरी है। इसे द स्कॉर्पियन पोज भी कहा जाता है।

वृश्चिकासन के फायदे-  

  • इस आसन के अभ्यास पीठ, धड़, पैर और कंधों को मजबूती मिलती है
  • पेट की चर्बी कम होती है
  • पेट से जुड़ी समस्याओं से निजात मिलता है
  • फेफड़ों के लिए बेहद फायदेमंद है
  • मस्तिष्क में ब्लड सर्कुलेशन तेज होता है
  • चिंता और तनाव दूर होता है
  • स्वस्तिकासन- स्वस्ति का अर्थ होता है शुभ। यह आसन हर स्थिति में अच्छा महसूस कराता है इसलिए इसको स्वस्ति या शुभ आसन कहते हैं। यह आसन शरीर को स्थिर करने वाला है।

स्वस्तिकासन के फायदे-  

  • घुटनों के दर्द से राहत मिलती है
  • शरीर को शुद्ध करता है
  • मानसिक शांति प्रदान करता है
  • कमर को सीधा करता है
  • राजकपोतासन- राजकपोतासन का अभ्यास करते हुए योगी कबूतर द्वारा संभोग के दौरान अपनी विपरीतलिंगी को आकर्षित करने के लिए सीने को फुलाने जैसी मुद्रा करता है।

राजकपोतासन के फायदे-

  • पेट के अंदर मौजूद अंगों की मसाज करने में मददगार है
  • हिप एरिया में लचीलापन आता है
  • सीना चौड़ा होता है और कमर दर्द से राहत मिलती है
  • नपुंसकता दूर होती है
  • त्रिविक्रमासन- यह योगासन हठ योग का प्रमुख आसन माना जाता है। शुरुआत में इसका अभ्यास थोड़ा कठिन हो सकता है, लेकिन नियमित रूप से अभ्यास करने पर आसानी से कर सकते हैं।

त्रिविक्रमासन के फायदे-

  • शरीर के तीनों चक्र सक्रिय होते हैं
  • मानसिक शांति मिलती है
  • पैरों की मांसपेशियों और हैमस्ट्रिंग की मांसपेशियों को मजबूत और लचीला बनाता है
  • पाचन तंत्र सही होता है
  • मासिक धर्म संबंधी समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए असरदार है
  • सिर दर्द की समस्या और अनिद्रा से राहत दिलाता है
  • ऊर्ध्वमुख श्वानासन- यह आसन 4 शब्दों से मिलकर बना है। पहला शब्द ऊर्ध्व मतलब ऊपर, दूसरा शब्द मुख मतलब  चेहरा, तीसरा शब्द श्वान मतलब कुत्ता और आसन मतलब मुद्रा।

ऊर्ध्वमुख श्वानासन के फायदे-  

  • आलस और थकान दूर होती है
  • अस्थमा रोगियों के लिए बेहद फायदेमंद है
  • मयूरासन- इस आसन को करने के दौरान शरीर मोर की मुद्रा में होता है। मयूर का अर्थ मोर होता है इसलिए इस आसन को मयूरासन कहा जाता है।

मयूरासन के फायदे-

  • फेफड़ों के लिए काफी लाभदायक है
  • ब्लड सर्कुलेशन नियमित करता है
  • हाथ, पैर और कंधे की मांसपेशियां मजबूत होती हैं
  • चेहरे पर चमक लाने में मदद करता है
  • भारद्वाजासन- यह आसन ऋषि भारद्वाज को समर्पित है।

भारद्वाजासन के फायदे-

  • पाचन क्रिया मजबूत होती है
  • रीढ़ की हड्डी में लचीलापन आता है
  • नियमित अभ्यास से साइटिका जैसी बीमारी दूर हो जाती है
  • जोड़ों का दर्द दूर होता है
  • जानुशीर्षासन- जानुशीर्षासन संस्कृत शब्द है। जानु का अर्थ घुटना, शीर्ष का अर्थ सिर और आसन का अर्थ मुद्रा है।

जानुशीर्षासन के फायदे-

  • अवसाद से छुटकारा पाने में मदद मिलती है
  • दिमाग शांत होता है
  • पैरों के दर्द से आराम मिलता है
  • मासिक धर्म के दौरान राहत मिलती है
  • कुमार्सन- इस योगा के अभ्यास के दौरान शरीर कछुआ की मुद्रा में होता है इसलिए इसे इंग्लिश में टर्टल पोज भी कहते हैं। बता दें, कुर्मा का अर्थ कछुआ होता है।

कुमार्सन के फायदे-

  • आयु बढ़ती है
  • एकाग्रता बढ़ती है
  • तनाव और अवसाद कम करने में मददगार है
  • घुटने, कूल्हे, पीठदर्द से राहत मिलती है
  • मत्स्यासन- इस योगा के अभ्यास के दौरान शरीर मछली की मुद्रा में होता है इसलिए इसे इंग्लिश में फिश पोज भी कहते हैं। बता दें, मत्स्य का अर्थ मछली होता है।

मत्स्यासन के फायदे-

  • पेट की चर्बी घटती है
  • मासिक धर्म संबंधी परेशानी से राहत मिलती है
  • खांसी दूर होती है
  • पूरा शरीर मजबूत बनता है
  • परिघासन- परिघासन दो संस्कृत शब्दों से मिलकर बना है। परिघ का अर्थ द्वार, दरवाजा या गेट होता है। वहीं, आसन का अर्थ मुद्रा होता है।

परिघासन के फायदे-

  • सांस लेने वाली समस्याओं से राहत मिलती है
  • मांसपेशियों को स्ट्रेच करता है
  • पार्श्वोत्तानासन-  यह दो शब्दों से मिलकर बना है। पार्श्व का अर्थ छाती के दाएं-बाएं का भाग और उत्तान मतलब खिंचा हुआ।  

पार्श्वोत्तानासन के फायदे-

  • रीढ़ की हड्डी मजबूत होती है
  • पाचन में सुधार होता है
  • पैरों को मजबूती मिलती है
  • लिवर और पेट की अच्छी मालिश होती है
  • स्प्लिट (Split)- स्प्लिट एक्सरसाइज बॉडी को फ्लैक्सिबल बनाती है। इस योगासन के अभ्यास के दौरान पैर एक दूसरे के अनुरूप होते हैं और विपरीत दिशाओं में विस्तारित होते हैं।

स्प्लिट के फायदे-

  • जांघ और कुल्हों का मोटापा कम होने लगता है
  • मांसपेशियां मजबूत होती हैं
  • शरीर में लचीलापन आता है
  • सुखासन- शांतिपाने और तनाव को दूर भगाने में यह आसन काफी लाभदायक है। सुखासन संस्कृत के दो शब्दों से मिलकर बना है- सुख और आसन।  इस आसन को करने से शरीर में ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है, जो शरीर को किसी भी प्रकार के इंफेक्शन से बचाने में मदद करता है।

सुखासन के फायदे-  

  • इस आसन के अभ्यास से तनाव कम होता है
  • मानसिक शांति मिलती है
  • ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है
  • हार्ट संबंधी परेशानियों से राहत दिलाने में मदद करता है
  • एकाग्रता बढ़ती है और गुस्सा कम करने में मदद करता है
  • सुप्त पादांगुष्ठासन- यह आसन धावक (Runners) और एथलीटों (Atheletes) के लिए बेहद फायदेमंद है। सुप्त पादांगुष्ठासन चार संस्कृत शब्दों से मिलकर बना है। पहले शब्द सुप्त का अर्थ है लेटा हुआ। दूसरा शब्द है पाद, जिसका अर्थ है पैर। वहीं, तीसरे शब्द अंगुष्ठ का अर्थ है अंगूठा और चौथे शब्द आसन का अर्थ है किसी विशेष स्थिति में खड़े होने, लेटना या बैठना।

सुप्त पादांगुष्ठासन के फायदे-

  • प्रजनन प्रणाली अच्छी होती है
  • शरीर में हार्मोन बैलेंस होते हैं
  • ब्लड सर्कुलेशन बढ़ता है
  • बवासीर की समस्या से राहत मिलती है
  • भेकासन- इस आसन में शरीर मेंढक की समान मुद्रा में होता है। यह आसन दो शब्दों से मिलकर बना है- भेक का अर्थ होता है मेंढक और आसन मतलब मुद्रा। इस आसन को अंग्रेजी में Frog Pose कहा जाता है।

भेकासन के फायदे-

  • भेकासन के अभ्यास से सांस लेने की क्षमता में सुधार होता है
  • पैरों की मांसपेशी में खिंचाव और मजबूती आती है
  • पाचन क्रिया तंदरुस्त होती है
  • हार्मोंस संतुलित होते हैं
  • हनुमानासन- इस आसन के दौरान शरीश बंदर के समान नजर आता है। यह फ्रंट स्पिल्टस योग का संस्करण है।

हनुमानासन के फायदे-

  • इस आसन के अभ्यास से पेट के अंगों की मालिश होती है
  • पैरों को लचीला बनाता है
  • रक्त संचार बढ़ाता है
  • प्रजनन प्रणाली की क्षमता बढ़ाता है
  • गर्भवती महिलाओं को डिलीवरी के लिए तैयार करता है
  • मालासन- यह आसन ऑफिस में देर तक बैठकर काम करने वाले लोगों के लिए बेहद फायदेमंद है। इसे गारलेंड पोज भी कहा जाता है। यह आसन शरीर और मानसिक दोनों क्षमता को बढ़ाता है।

मालासन के फायदे-

  • गर्भपात की समस्या दूर होती है
  • मानसिक और शारीरिक संतुलन सही रहता है
  • गर्दन के आसपास की जकड़न दूर होती है
  • जांघ और पेट की चर्बी कम होती है
  • गर्भाशय संबंधी तकलीफ से निजात मिलता है
  • अष्टावक्रासन- शुरुआत में इस आसन को करने में मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है, लेकिन ये शरीर के लिए बेहद लाभदायक है। इस आसन में 8 कोण मुद्रा बनती है। ये योग राजा जनक के आध्यात्मिक गुरु ऋषि अष्टवक्र को समर्पित है।

अष्टवक्रासन के फायदे-

  • इस आसन के नियमित अभ्यास से एक साथ बॉडी की सभी मसल्स की एक्सरसाइज होती है
  • शरीर को ऊर्जा मिलती है
  • पाचन तंत्र सही रहता है
  •  
  • बालासन- यह आसन शवासन की तरह की पूरे शरीर को रिलेक्स करता है। इस आसन को करने के लिए सबसे पहले व्रजासन की अवस्था में बैठ जाएं। इसके बाद अपने सिर को जमीन पर स्पर्श कराएं। अब दोनों हाथों को जमीन पर रख लें और अपनी छाती से अपने जांघों पर दबाव डालें।

बालासन के फायदे-

  • ये आसन कूल्हों, जांघों और टखनों में मामूली सा खिंचाव लाता है
  • बालासन पीठ और गर्दन के दर्द से छुटकारा दिलाता है
  • ये आसन संपूर्ण शरीर को आराम देता है
  • दिमाग को शांत और तनाव-अवसाद से राहत देता है
  • पाशासन- पाशासन एक खास योग मुद्रा है, जिसे नूज पोज के नाम से भी जाना जाता है।

पाशासन के फायदे-

  • वेट लॉस में काफी मददगार है
  • नियमित अभ्यास से तनाव कम होता है
  • जांघों में मजबूती आती है
  • शरीर के पॉश्चर में सुधार आता है
  • प्रसारित पादोत्तानासन- ये आसन संस्कृत के 4 शब्दों से मिलकर बना है- प्रसारित का अर्थ फैलाना। दूसरे शब्द पाद का अर्थ पैर है, तीसरे शब्द उत्तान का अर्थ आगे की तरफ झुकना और चौथे शब्द आसन का अर्थ किसी विशेष स्थिति में खड़े होने, झुकने या बैठने से होता है।

प्रसारित पादोत्तानासन के फायदे-

  • इस आसन से पैरों और एड़ी को मजबूती मिलती है
  • रीढ़ की हड्डी सीधी और मजबूत होती है
  • पेट की मांसपेशियां मजबूत होंगी
  • मस्तिष्क में ब्लड सर्कुलेशन तेज होता है  
  • सिंहासन (Lion pose)-  इस आसन के अभ्यास के दौरान शरीर सिंह यानी शेर जैसी मुद्रा में आ जाता है इसलिए इसे सिंहासन कहा जाता है।

सिंहासन के फायदे-

  • इस आसन के अभ्यास से त्वचा में चमक आती है
  • चेहरे पर पड़ी झुर्रियां गायब होने लगती है
  • फेफड़ों की बीमारी और सांस लेने की समस्या से निजात मिलता है
  • टिटिभासना- इस आसन के अभ्यास के दौरान शरीर एक चिड़िया के समान हो जाता है। अभ्यास के दौरान व्यक्ति पैर हवा में और पूरा बल हाथों में डालता है। आधुनिक योग में इसे हाथ संतुलन योग कहा गया है।

टिटिभासना के फायदे-

  • पैरों की मांसपेशियों में मजबूती आती है
  • स्किन में ग्लो बढ़ता है
  • रीढ़ की हड्डी में खींचाव आता है
  • बाजुओं को कलाई को मजबूती मिलती है
  • योगनिद्रासन (Sleep Pose)इस आसन को इंग्लिश में स्लीप पोज कहा जाता है। इस योगासन के अभ्यास के दौरान शख्स नींद और जागने की बीच की अवस्था में होता है, जिससे शरीर में ताजगी और ऊर्जा का प्रवाह होता है।

योगनिद्रासन के फायदे-

  • शरीर को काफी आराम मिलता है
  • एकाग्रता बढ़ाने में मदद मिलती है
  • शरीर के पुराने दर्द मिटाने में मदद मिलती है
  • शारीरिक तापमान में कमी आती है
  • अर्धचंद्रासन- इस आसन के नाम का अर्थ है आधे चांद के समान की गई मुद्रा। इसके अभ्यास के दौरान शरीर आधे चंद्र के समान नजर आता है। इस आसन का आकार त्रिकोण बनता है इसलिए इसे त्रिकोणासन भी कहते हैं।

अर्धचंद्रासन के फायदे-

  • इस आसन के अभ्यास से शरीर में संतुलन विकसित होता है
  • मूत्रनली और गर्भाशय से संबंधित स्त्री रोगों में लाभकारी होता है
  • छाती और गर्दन को पर्याप्त खिंचाव प्रदान करता है   
  • मत्स्येंद्रासन- इस आसन का नाम ऋषि मत्स्येंद्रनाथ के नाम पर रखा गया है। यह उनकी पसंदीदा मुद्रा थी। हालांकि, यह आसन काफी कठिन है।

मत्स्येंद्रासन के फायदे-

  • इस आसन के नियमित अभ्यास से फेफड़ों में ऑक्सीजन की आपूर्ती होती है
  • पेट के अंगों की मालिश करता है
  • रीढ़ की हड्डी में लचीलापन बढ़ाता है
  • तुलासन- इस योगासन के दौरान शरीर तुला यानी तराजू जैसी मुद्रा में हो जाता है इसलिए इस आसन को तुलासन कहा जाता है। इसे अंग्रेजी में बैलेंस पोज भी कहा जाता है।

तुलासन के फायदे-

  • इसके नियमित अभ्यास से मांसपेशियां लचीली और मजबूत बनती हैं
  • पेट की कई समस्याओं से छुटकारा मिलता है
  • हाथ-पैर और कलाइयों में होने वाले दर्द से निजात मिलता है
  • शीघ्र पतन की समस्या से छुटकारा पाया जा सकता है
  • अधोमुखवृक्षासन- इस योगासन के अभ्यास के दौरान हाथों के बल शरीर का भार उठाते हैं। हाथों को लगभग कंधे चौड़ाई के अलावा पैरों को एक साथ रखा जाता है।

अधोमुखवृक्षासन के फायदे-

  • ब्लड सर्कुलेशन बढ़ाने में मदद मिलती है
  • इस आसन का अभ्यास आंखों के लिए बेहद फायदेमंद है
  • हाथ, कंधे और शरीर के ऊपरी हिस्से को मजबूती मिलती है
  • तनाव कम करने में मदद मिलती है
  • पाचन तंत्र को बढ़ाने में मदद मिलती है
  • कपोतासन-  इस आसन को अंग्रेजी में पिजन पोज कहा जाता है। यह आसन घुटनों के बल झुकने वाली मुद्रा है।

कपोतासन के फायदे-

  • सके नियमित अभ्यास से कमर दर्द से राहत मिलता है
  • ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करता है
  • शरीर सुडौल बनता है
  • यूरीन सिस्टम दुरूस्त होता है
  • सीना चौड़ा होता है
  • पेट का एक्स्ट्रा फैट कम होता है
  • मरीच्यासन- मरीच्यासन का नाम ऋषि मरीचि के नाम पर रखा गया है। इस आसन के नियमित अभ्यास से कमर और रीढ़ की हड्डी को बहुत लाभ मिलता है।

मरीच्यासन के फायदे-

  • दिमाग शांत होता है
  • अवसाद से छुटकारा मिलता है
  • पाचन तंत्र में सुधार होता है
  • रीढ़ की हड्डी और कमर में लचीलापन आता है
  • उत्थिता वशिष्ठासन- इस आसन को अंग्रेजी में साइड प्लैंक पोज कहा जाता है। आधुनिक योग में इसे व्यायाम के रूप में संतुलित आसन माना गया है।

उत्थिता वशिष्ठासन के फायदे-

  • यह शरीर से एक्सट्रा फैट को घटाता है
  • काफी मात्रा में कैलोरी को बर्न करता है यह आसन
  • इस आसन का नियमित अभ्यास शरीर को टोन बनाता है
  • वीरासन- इस आसन को हीरो पोज भी कहा जाता है। यह आसन शरीर को खींचाव प्रदान करता है।

वीरासन के फायदे-

  • अस्थमा के मरीजों के लिए बहुत फायदेमंद है
  • इसके नियमित अभ्यास से ब्लड प्रेशर कंट्रोल रहता है
  • पाचन तंत्र मजबूत होता है
  • यह आसन मानसिक स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद है
  • आकर्ण धनुरासन- संस्कृत में कर्ण का अर्थ कान और आकर्ण का अर्थ कान के पास होता है। वहीं, आकर्ण धनुरासन का अर्थ खींचे हुए धनुष और बाण जैसा आसन। इस आसन के अभ्यास के दौरान शरीर धनुष-बाण खींचने वाली मुद्रा में होता है।

आकर्ण धनुरासन के फायदे-

  • इस आसन के अभ्यास से कूल्हों और पैरों में लचीलापन आता है
  • नियमित अभ्यास से हाथ-पैरों के जोड़े के दर्द से राहत मिलती है
  • भुजपीड़ासन- इस आसन को शोल्डर प्रेसिंग पोज भी कहा जाता है। इस आसन को करने में शुरुआत में थोड़ी परेशानी होती है। ध्यान रहे कि इस आसन को खाली पेट करें।

भुजपीड़ासन के फायदे-

  • इस आसन के अभ्यास से एकाग्रता बढ़ती है
  • कलाई, हाथ और अपर बॉडी मजबूत होती है
  • मेटाबॉलिज्म बढ़ता है
  • नर्वस सिस्टम नियंत्रित रहता है
  • सिरदर्द को कम करने में मदद करता है
  • दुर्वासासन- यह आसन थोड़ा कठिन है, जिसे हर कोई नहीं कर सकता। अगर आप अपनी सेहत को लेकर आश्वस्त हैं, तो ही इस आसन का अभ्यास करें। माना जाता है कि इस आसन का नाम ऋषि दुर्वासा के नाम पर रखा गया है।

दुर्वासासन के फायदे-

  • यह शरीर को लचीला बनाता है
  • बॉडी में एक्टिवनेस लाता है
  • मांसपेशियों को मजबूती देती है
  • गोरक्षासन- शरीर को फिट रखने के लिए गोरक्षासन बहुत उपयोगी है। यह आसन शरीर की स्थूलता को समाप्त करता है। इस आसन का ज्यादातर उपयोग ध्यान और तांत्रिक साधना के लिए किया जाता है।  

गोरक्षासन के फायदे-

  • इस आसन के अभ्यास से पुरुषों में शुक्राणु की क्षमता बढ़ती है
  • इसके अभ्यास से भोजन अच्छी तरह से पचता है
  • इस आसन के नियमित अभ्यास से स्त्रियों में गर्भाशय से संबंधित रोग से छुटकारा पाया जा सकता गै
  • इसके अभ्यास से बवासीर से निजात पाया जा सकता है
  • स्वप्नदोष और शीघ्रपतन के दोष को मुक्त करता है
  • कौंडिन्यासन- इस आसन के जरिए एक हाथ पर पूरे शरीर का संतुलन बनाया जाता है। इस आसन और ऋषि कौंडिन्य की मुद्रा माना जाता है।

कौंडिन्यासन के फायदे-

  • ये शरीर को लचीला बनाता है
  • बॉडी में स्फूर्ती लाता है
  • पेट की चर्बी कम होती है
  • कुक्कुटासन- इस आसन के अभ्यास के दौरान शरीर मुर्गी के आकार जैसा हो जाता है। इसे रोस्टर आसन भी कहा जाता है।

कुक्कुटासन के फायदे-

  • थकावट दूर होती है
  • पाचन शक्ति बेहतर होती है
  • पेट की चर्बी कम होती है
  • हाई BP और हृदय रोगियों को इस आसन का अभ्यास नहीं करना चाहिए
  • लोलासन (Pendant Pose)-  लोलासन को अंग्रेजी में पेंडेंट पोज कहा जाता है। इस मुद्रा में शरीर का सारा वजन दोनों हाथों पर डाला जाता है।

लोलासन के फायदे-

  • ये आसन शरीर को लचीला और संतुलित बनाता है
  • तनाव में भी निजात मिलता है
  • पाचन तंत्र स्वस्थ रहता है
  • कंधे मजबूत होते हैं
  • कलाई और हाथों की मांसपेशियां मजबूत होती है
  • पीठ और पसलियों को मजबूत बनाता है
  • मकरासन- मकरासन संस्कृत के 2 शब्दों से मिलकर बना है। मकर यानी मगरमच्छ और आसन मतलब मुद्रा। इसके शाब्दिक अर्थ से ही साफ समझ में आता है कि इस मुद्रा में शरीर मगर की तरह हो जाता है। यह एक ऐसा आसन है, जिसमें आंखे बंद रखकर श्वास लेने की क्रिया की जाती है, जिसके कारण यह शरीर और दिमाग को बिल्कुल शांत रखता है और डिप्रेशन, बेचैनी, उलझन, माइग्रेन और मस्तिष्क से जुड़े विकारों को दूर करता है।

मकरासन के फायदे-

  • इस आसन के नियमित अभ्यास से डिप्रेशन पर काबू पाया जा सकता है
  • कमर दर्द से छुटकारा दिलाने में मदद करता है
  • बढ़ते मोटापे से परेशान लोगों के लिए बेहद फायदेमंद है
  • सर्दी-जुखाम और खांसी से भी राहत दिलाता
  • विपरीत करणी (Legs Up Pose)यह योगासन मन और शरीर के लिए सबसे रिलेक्सिंग पोज में से एक है। यह एजिंग साइन को रोकता है। इस आसन का नाम संस्कृत को दो शब्दों से बना है विपरीत और करणी, जिसमें विपरीत का अर्थ है उल्टा और करणी का मतलब है करना। यानी ‘उल्टा करना’ है।

वपिरीत करणी के फायदे-

  • आंख और कान से जुड़ी समस्याओं से निजात दिलाने में मदद करता है
  • चेहरे में ग्लो लाता है
  • मासिक धर्म के दौरान परेशान रहने वाली महिलाओं के लिए लाभकारी है
  • BP या गाठकिया जैसी बीमारी से लड़ने में मदद करता है

सभी 84 सर्वाधिक लोकप्रिय योगासनों के बारे में जानने के बाद आइए योगा के नियमों के बारे में जानते हैं-

योग के नियम Rules of Yoga

  • योग हमेशा किसी गुरू (ट्रेनर) के निर्देशन में शुरू करें
  • योग करने का सही समय सूर्योदय या सूर्यास्त होता है
  • योग करने से पहले स्नान जरूर करें
  • योग हमेशा खाली पेट करें। योग करने से 2 घंटे पहले कुछ न खाएं
  • इस दौरान आरामदायक सूती कपड़े पहनें
  • योग का अभ्यास शुरू करने से पहले सभी बुरे ख्यालों को अपने मन से निकाल दें
  • शांत और साफ वातावरण में योग करें
  • पूरा ध्यान अपने योगासनों के अभ्यास पर केंद्रित करें
  • धैर्य रखें और दृढ़ता के साथ प्रैक्टिस करें
  • किसी भी योगासन को करने के लिए शरीर के साथ जबरदस्ती बिल्कुल भी न करें
  • योग का निरंतर अभ्यास जारी रखें
  • योग करने के बाद 30 मिनट तक कुछ भी न खाएं। इसके अलावा 1 घंटे तक न नहाएं
  • प्राणायाम हमेशा आसन अभ्यास करने के बाद मतलब सबसे आखिरी में करें
  • किसी भी तरह की बीमारी के रोगी होने पर योगा का अभ्यास शुरू  करने से पहले एक बार अपने डॉक्टर से जरूर सलाह लें
  • योगाअभ्यास का अंत हमेशा शवासन से करें

योग के फायदे Benefits of Yoga

  • योग करने से काफी अच्छी नींद आती है, जिससे मन शांत रहता है। योग मानसिक सुकून देता है। स्वस्थ मन और मस्तिष्क के लिए रोजाना योग का अभ्यास करें।
  • सुबह योग करने से पूरे दिन ऊर्जावान रहा जा सकता है। यह शरीर से आलस को दूर कर तरोताजा रखने में भी मदद करता है। योग करने वाला व्यक्ति शारीरिक रूप से सक्रिय, तनावमुक्त और हमेशा खुश नजर आता है।
  • नियमित रूप से योग का अभ्यास करने से कई बीमारियों से निजात मिलता है। व्यक्ति हमेशा स्वस्थ रहता है।
  • रोजाना योग का अभ्यास शरीर को लचीला बनाता है और ब्लड सर्कुलेशन बेहतर करता है, जिससे सभी अंग सुचारू रूप से काम करते हैं। एक फ्लैक्सिबल बॉडी बनाने में योग काफी हद तक मदद करता है।

योग के दौरान बरती जाने वाली सावधानी Precautions to be taken while practicing the Yoga

  • ज्यादातर महिलाओं के मासिक धर्म के दौरान योग नहीं करने की सलाह दी जाती है, लेकिन आप अपनी क्षमता अनुसार करने या नहीं करने का फैसला कर सकती हैं
  • 10 साल से कम उम्र के बच्चों को ज्यादा कठिन आसनों का अभ्यास नहीं करना चाहिए
  • अपने खाने-पीने में संयम बरतें
  • धूम्रपान (Smoking) या तंबाकू (Tobacco) की आदत हो तो उसे छोड़ दें। योग के अभ्यास से भी इन आदतों को छोड़नेस की कोशिश की जा सकती है
  • नींद जरूरी है इसलिए भरपूर नींद लें
  • अपनी डाइट में पौष्टिक आहार शामिल करें

नोट-  इस आर्टिकल में दी गई सभी जानकारी एक रिसर्च पर आधारीत है। कोई भी योगासन का अभ्यास शुरू करने से पहले एक बार परामर्श जरूर लें

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